Shri Sai Baba Ji 108 Mantra With Meaning – Namawali

Shri Sai Baba Ji 108 Mantra With Meaning - Namawali
Shri Sai Baba Ji 108 Mantra With Meaning – Namawali


1. ‘ॐ श्री साईंनाथाय नम:’।-ॐ श्री साईंनाथ को नमस्कार।

2. ‘ॐ श्री साईं लक्ष्मी नारायणाय नम:’।
-ॐ जो लक्ष्मीनारायण के स्वरूप हैं, उन श्री साईंनाथ को नमस्कार।


3. ‘ॐ श्री साईं कृष्णमशिवमारूतयादिरूपाय नम:’।
-ॐ जो श्रीकृष्ण, राम, शिव, मारुति आदि देवताओं के स्वरूप हैं, उन श्री साईंनाथ को नमस्कार।


4. ‘ॐ श्री साईं शेषशायिने नम:’।
-ॐ जो शेषनाग पर शयन करने वाले भगवान विष्णु के अवतार हैं, उन श्री साईंनाथ को नमस्कार।

5. ‘ॐ श्री साईं गोदावीरतटीशीलाधीवासिने नम:’।
-ॐ जो गोदावरी नदी के तट पर बसी ‘शीलधी’ (शिरडी) में निवास करने वाले हैं, उन श्री साईंनाथ को नमस्कार।


6. ‘ॐ श्री साईं भक्तहृदालयाय नम:’।
-ॐ जो भक्तों के मन में विराजमान हैं, उन श्री साईंनाथ को नमस्कार।

7. ‘ॐ श्री साईं सर्वहृन्निलयाय नम:’।
-ॐ जो सभी प्राणियों के मन में निवास करने वाले हैं, उन श्री साईंनाथ को नमस्कार।

8. ‘ॐ श्री साईं भूतावासाय नम:’।-

ॐ जो समस्त प्राणियों में बसते हैं, उन श्री साईंनाथ को नमस्कार।


9. ‘ॐ श्री साईं भूतभविष्यदुभवाज्रिताया नम:’।
-ॐ जो भूत तथा भविष्य की चिंताओं से मुक्त करने वाले हैं, उन श्री साईंनाथ को नमस्कार।

10. ‘ॐ श्री साईं कालातीताय नम:’।
-ॐ जो काल की सीमाओं से परे हैं, उन श्री साईंनाथ को नमस्कार।


11. ‘ॐ श्री साईं कालायः नम:’।
-ॐ जो काल अर्थात समय के स्वामी हैं, उन श्री साईंनाथ को नमस्कार।

12. ‘ॐ श्री साईं कालकालाय नम:’।
-ॐ जो काल की सीमाओं से परे हैं, उन श्री साईंनाथ को नमस्कार।

13. ‘ॐ श्री साईं कालदर्पदमनाय नम:’।-ॐ जो काल (मृत्युदेव) के अहंकार का नाश करते हैं, उन श्री साईंनाथ को नमस्कार।

14. ‘ॐ श्री साईं मृत्युंजयाय नम:’।
-ॐ जो मृत्यु को जीतने वाले हैं, उन श्री साईंनाथ को नमस्कार।

15. ‘ॐ श्री साईं अमर्त्याय नम:’।
-ॐ जो अमरत्व को पाए हैं, उन श्री साईंनाथ को नमस्कार।

Shri Sai Baba Ji 108 Mantra With Meaning – Namawali

16. ‘ॐ श्री साईं मर्त्याभयप्रदाय नम:’।
-ॐ जो मृत्यु के भय से रक्षा करने वाले हैं, उन श्री साईंनाथ को नमस्कार।

17. ‘ॐ श्री साईं जिवाधाराय नम:’।
-ॐ जो समस्त जीवों के आधार हैं, उन श्री साईंनाथ को नमस्कार।

18. ‘ॐ श्री साईं सर्वाधाराय नम:’।-ॐ जो समस्त ब्रह्मांड के आधार हैं, उन श्री साईंनाथ को नमस्कार।

19. ‘ॐ श्री साईं भक्तावनसमर्थाय नम:’।
-ॐ जो भक्तों की रक्षा करने में समर्थ हैं, उन श्री साईंनाथ को नमस्कार।

20. ‘ॐ श्री साईं भक्तावनप्रतिज्ञाय नम:’।
-ॐ जो भक्तों की रक्षा करने हेतु प्रतिज्ञाबद्ध हैं, उन श्री साईंनाथ को नमस्कार।


21. ‘ॐ श्री साईं अन्नवस्त्रदाय नम:’।
-ॐ जो अन्न और वस्त्र के दाता हैं, उन श्री साईंनाथ को नमस्कार।

22. ‘ॐ श्री साईं आरोग्यक्षेमदाय नम:’।
-ॐ जो आरोग्य और कल्याण प्रदान करने वाले हैं, उन श्री साईंनाथ को नमस्कार।

23. ‘ॐ श्री साईं धनमांगल्यप्रदाय नम:’।-ॐ जो धन तथा मांगल्य प्रदान करने वाले हैं, उन श्री साईंनाथ को नमस्कार।

24. ‘ॐ श्री साईं ऋद्धिसिद्धिदाय नम:’।
-ॐ जो ऋद्धि-सिद्धि को देने वाले हैं, उन श्री साईंनाथ को नमस्कार।

25. ‘ॐ श्री साईं पुत्रमित्रकलत्रबंधुदाय नम:’।
-ॐ जो पुत्र, मित्र, पति अथवा पत्नी और संबंधी देने वाले हैं, उन श्री साईंनाथ को नमस्कार।

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26. ‘ॐ श्री साईं योगक्षेमवहाय नम:’।
-ॐ जो भक्तों को सभी तरह का सुख प्रदान करने तथा कल्याण की जिम्मेदारी उठाने वाले हैं, उन श्री साईंनाथ को नमस्कार।


27. ‘ॐ श्री साईं आपदबांधवाय नम:’। ॐ जो संकट के समय बंधु के समान रक्षा करने वाले हैं, उन श्री साईंनाथ को नमस्कार।


-28. ‘ॐ श्री साईं मार्गबंधवे नम:’।
-ॐ जो जीवन मार्ग के साथी हैं, उन श्री साईंनाथ को नमस्कार।


29. ‘ॐ श्री साईं भक्तिमुक्तिस्वर्गापवर्गदाय नम:’।
-ॐ जो सांसारिक वैभव, मोक्ष और नैसर्गिक आनंद व अंतिम उत्सर्ग को प्रदान करने वाले हैं, उन श्री साईंनाथ को नमस्कार।

30. ‘ॐ श्री साईं प्रियाय नम:’।
-ॐ जो भक्तों के प्रिय हैं, उन श्री साईंनाथ को नमस्कार।


31. ‘ॐ श्री साईं प्रीतिवर्द्धनाय नम:’।
-ॐ जो प्रीति को बढ़ाने वाले हैं, उन श्री साईंनाथ को नमस्कार।


32. ‘ॐ श्री साईं अंतर्यामिणे नम:’।- ॐ जो अंतर्यामी, अर्थात मन की समस्त भावनाओं से परे हैं, उन श्री साईंनाथ को नमस्कार।


33. ‘ॐ श्री साईं सच्चिदानात्मने नम:’।
-ॐ जो सत्य और विशुद्ध आत्मा के प्रतीक हैं, उन श्री साईंनाथ को नमस्कार।


34. ‘ॐ श्री साईं नित्यानंदाय नम:’।
-ॐ जो नित्य आनंद हैं, उन श्री साईंनाथ को नमस्कार।

35. ‘ॐ श्री साईं परमसुखदाय नम:’।
-ॐ जो परम सुख को देने वाले हैं, उन श्री साईंनाथ को नमस्कार।


36. ‘ॐ श्री साईं परमेश्वराय नम:’।
-ॐ जो परमेश्वर हैं, उन श्री साईंनाथ को नमस्कार।


37. ‘ॐ श्री साईं परब्रह्मणे नम:’।
-ॐ जो साक्षात् परब्रह्म स्वरूप हैं, उन श्री साईंनाथ को नमस्कार।

38. ‘ॐ श्री साईं परमात्मने नम:’।
-ॐ जो परमात्मा स्वरूप हैं, उन श्री साईंनाथ को नमस्कार।


39. ‘ॐ श्री साईं ज्ञानस्वरूपिणे नम:’।
-ॐ जो साक्षात् ज्ञान के स्वरूप हैं, उन श्री साईंनाथ को नमस्कार।


40. ‘ॐ श्री साईं जगत: पित्रे नम:’। –

ॐ जो जगत पिता हैं अर्थात संसार के रचयिता हैं, उन श्री साईंनाथ को नमस्कार।


41. ‘ॐ श्री साईं भक्तानां मतधातपितामहाय नम:’।
-ॐ जो भक्तों के माता, पालनकर्ता और पितामह हैं, उन श्री साईंनाथ को नमस्कार।


42. ‘ॐ श्री साईं भक्ताभय प्रदाय नम:’।
-ॐ जो भक्तों को अभयदान देने वाले हैं, उन श्री साईंनाथ को नमस्कार।

43. ‘ॐ श्री साईं भक्तपराधिनाय नम:’।
-ॐ जो भक्तों के अधीन होकर उनके ही कल्याण में लगे हुए हैं, उन श्री साईंनाथ को नमस्कार।


44. ‘ॐ श्री साईं भक्तानुग्रहकातराय नम:’।
-ॐ जो भक्तों पर अपनी कृपा या अनुग्रह बनाए रखने के लिए अति दयावान हैं, उन श्री साईंनाथ को नमस्कार।

45. ‘ॐ श्री साईं शरणागतवत्सलाय नम:’।
-ॐ जो अपनी शरण में आए भक्त पर वात्सल्य रखने वाले हैं, उन श्री साईंनाथ को नमस्कार।


46. ‘ॐ श्री साईं भक्तिशक्तिप्रदाय नम:’।


-ॐ जो भक्ति और शक्ति देने वाले हैं, उन श्री साईंनाथ को नमस्कार।


47. ‘ॐ श्री साईं ज्ञानवैराग्यपदाय नम:’।-

ॐ जो ज्ञान और वैराग्य प्रदान करने वाले हैं, उन श्री साईंनाथ को नमस्कार।


48. ‘ॐ श्री साईं प्रेमप्रदाय नम:’।
-ॐ जो प्रेम देने वाले हैं, उन श्री साईंनाथ को नमस्कार।


49. ‘ॐ श्री साईं संशयहृदयदोर्बल्यपापकर्म नम:’।
-ॐ जो समस्त संदेहों, मन की दुर्बलता, पाप-कर्म तथा वासना का नाश करने वाले हैं, उन श्री साईंनाथ को नमस्कार।

50. ‘ॐ श्री साईं हृदयग्रन्थिवेदकाय नम:’।
-ॐ जो मन और विचारों में पड़ी हुई समस्त ग्रंथियों को खोल देने वाले हैं, उन श्री साईंनाथ को नमस्कार।

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51. ‘ॐ श्री साईं कर्मध्वंसिने नम:’।
-ॐ जो पाप-कर्मों से होने वाले प्रभाव को नष्ट करते हैं, उन श्री साईंनाथ को नमस्कार।

52. ‘ॐ श्री साईं सुद्धसत्त्वस्थिताय नम:’।
-ॐ जो शुद्ध मन सात्विक भावों पर संस्थापित हैं, उन श्री साईंनाथ को नमस्कार।


53. ‘ॐ श्री साईं गुणातीतगुणात्मने नम:’।
-ॐ जो गुणों से परे हैं और समस्त सद्गुणों से परिपूर्ण हैं, उन श्री साईंनाथ को नमस्कार।


54. ‘ॐ श्री साईं अनंत कल्याणगुणाय नम:’।

-ॐ जो अनंत कल्याणकारी हैं, उन श्री साईंनाथ को नमस्कार।

55. ‘ॐ श्री साईं अमितपराक्रमाय नम:’।

 -ॐ जो असीमित पराक्रम और वीरता के स्वामी हैं, उन श्री साईंनाथ को नमस्कार। 

56. ‘ॐ श्री साईं जयिने नम:’। 

-ॐ जो स्वयं जय हैं, उन श्री साईंनाथ को नमस्कार।

 57. ‘ॐ श्री साईं दुर्घषोक्षोभ्याम नम:’।

 -ॐ जो अत्यंत कठिन को भी सरल करने वाले हैं, उन श्री साईंनाथ को नमस्कार।

 58. ‘ॐ श्री साईं अपराजितय नम:’। 

-ॐ जो सदा अजेय हैं, उन श्री साईंनाथ को नमस्कार।

 59. ‘ॐ श्री साईं त्रिलोकेषु अनिघातगतये नम:’। 

-ॐ जो तीनों लोकों के स्वामी, जिनके कल्याणकारी सद्कर्मों में कोई भी विघ्न नहीं हैं, उन श्री साईंनाथ को नमस्कार। 

60. ‘ॐ श्री साईं अशक्यरहिताय नम:’।

-ॐ जिनकी शक्ति से कोई भी बाहर नहीं हैं ऐसे सद्गुरु श्री साईंनाथ को नमस्कार। 

61. ‘ॐ श्री साईं सर्वशक्तिमूर्तये नम:’। 

-ॐ जो सर्वशक्ति परमात्मा के स्वरूप हैं, उन श्री साईंनाथ को नमस्कार। 

62. ‘ॐ श्री साईं सुसरूपसुंदराय नम:’। 

-ॐ जो अत्यंत मनोहारी स्वरूप वाले हैं, उन श्री साईंनाथ को नमस्कार। 

63. ‘ॐ श्री साईं सुलोचनाय नम:’। 

-ॐ जो अत्यंत सुंदर नेत्र वाले हैं, उन श्री साईंनाथ को नमस्कार। 

64.’ॐ श्री साईं बहुरूपविश्वमूर्तये नम:’।
-ॐ जो बहुरूपी, विश्वरूपी, सर्वरूपी हैं, उन श्री साईंनाथ को नमस्कार।

65.’ॐ श्री साईं अरूपाव्यक्ताय नम:’।
-ॐ जो निराकार हैं जिनके स्वरूप को व्यक्त नहीं किया जा सकता, ऐसे श्री साईंनाथ को नमस्कार।

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66.’ॐ श्री साईं अचिंताय नम:’।
-ॐ जो अकल्पनीय, अगम्य और गहन स्वरूप वाले हैं, उन श्री साईंनाथ को नमस्कार।

67.’ॐ श्री साईं सूक्ष्माय नम:’।
-ॐ जो अत्यंत सूक्ष्म रूप धारण करने वाले हैं, उन सर्वव्यापी प्रभु श्री साईंनाथ को नमस्कार।

68.’ॐ श्री साईं सर्वान्तर्यामिणे नम:’।
-ॐ जो समस्त जीवों की अंतरात्मा या हृदय में वास करते हैं, उन श्री साईंनाथ को नमस्कार।

69.’ॐ श्री साईं मनोवागतिताय नम:’।
-ॐ जो भक्तों के मन और वाणी से परे हैं, उन श्री साईंनाथ को नमस्कार।

70.’ॐ श्री साईं प्रेममूर्तये नम:’।
-ॐ जो साक्षात् प्यार और करुणा के अवतार हैं, उन श्री साईंनाथ को नमस्कार।

71.’ॐ श्री साईं सुलभदुर्लभाय नम:’।
-ॐ जो भक्त हेतु अत्यंत सुलभ, किंतु दुष्ट आत्मा हेतु अति दुर्लभ हैं, उन श्री साईंनाथ को नमस्कार।

72.’ॐ श्री साईं असहायसहायाय नम:’।
-ॐ जो असहायों के सहायक हैं, उन श्री साईंनाथ को नमस्कार।

73.’ॐ श्री साईं अनाथनाथदीनबन्धवे नम:’।
-ॐ जो अनाथों के नाथ हैं तथा गरीबों के बंधु हैं, उन श्री साईंनाथ को नमस्कार।

74.’ॐ श्री साईं सर्वभारभ्रते नम:’।
-ॐ जो भक्तों के समस्त दुखों के भार स्वयं पर लेने वाले हैं, उन श्री साईंनाथ को नमस्कार।

75.’ॐ श्री साईं अकर्मानेककर्मसुकर्मिणे नम:’।
-ॐ जो स्वयं अकर्मा होकर अपने सुकर्मों को करने वाले भी हैं, उन श्री साईंनाथ को नमस्कार।

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76.’ॐ श्री साईं पुण्यश्रवणकीर्तनाय नम:’।
-ॐ जिनका सतत नाम स्मरण और कीर्तन सुनने से पुण्य की प्राप्ति हैं, ऐसे श्री साईंनाथ को नमस्कार।

77.’ॐ श्री साईं तीर्थाय नम:’।
-ॐ जो समस्त तीर्थों के साक्षात् स्वरूप हैं, उन श्री साईंनाथ को नमस्कार।

78.’ॐ श्री साईं वासुदेवाय नम:’।
-ॐ जो श्री वासुदेव के स्वरूप हैं, उन श्री साईंनाथ को नमस्कार।

79.’ॐ श्री साईं सता गतये नम:’।
-ॐ जो सज्जनों के गंतव्य हैं, उन श्री साईंनाथ को नमस्कार।

80.’ॐ श्री साईं सत्परायणाय नम:’।
-ॐ जो सत्य के पूर्णतया समर्पित हैं, उन श्री साईंनाथ को नमस्कार।

81.’ॐ श्री साईं लोकनाथाय नम:’।
-ॐ जो समस्त लोकों के प्रभु हैं, उन श्री साईंनाथ को नमस्कार।

82.’ॐ श्री साईं पावनानधाय नम:’।
-ॐ जो पावन-पवित्र रूपधारी और दोषरहित हैं, उन श्री साईंनाथ को नमस्कार।

83.’ॐ श्री साईं अमृतांशवे नम:’।
-ॐ जो अमृत के एक अंश हैं, उन अमृतमय श्री साईंनाथ को नमस्कार।

84.’ॐ श्री साईं भास्करप्रभाय नम:’।
-ॐ जो दैदीप्यमान सूर्य के समान आभा वाले हैं, उन श्री साईंनाथ को नमस्कार।

85.’ॐ श्री साईं ब्रह्मचर्यतपश्चर्यादिसुव्रताय नम:’।
-ॐ जो ब्रह्मचर्य, तपश्चर्य और अन्य सुब्रतों में स्थित हैं, उन श्री साईंनाथ को नमस्कार।

86.’ॐ श्री साईं सत्यधर्मपराणाय नम:’।
-ॐ जो सत्य और धर्म का पालन करने वाले हैं, उन श्री साईंनाथ को नमस्कार।

87.’ॐ श्री साईं सिद्धेश्वराय नम:’।
-ॐ जो सभी सिद्धियों के स्वामी हैं, उन श्री साईंनाथ को नमस्कार।

88.’ॐ श्री साईं सिद्धसंकल्पाय नम:’।
-ॐ जिनका संकल्प सदैव सिद्ध होता है, उन श्री साईंनाथ को नमस्कार।

89.’ॐ श्री साईं योगेश्वराय नम:’।
-ॐ जो योग के ईश्वर हैं, उन श्री साईंनाथ को नमस्कार।

90.’ॐ श्री साईं भगवते नम:’।
-ॐ जो समस्त दैवीय गुणों के स्वामी हैं, उन श्री साईंनाथ को नमस्कार।

91.’ॐ श्री साईं भक्तवत्सलाय नम:’।
-ॐ जो भक्तों पर वात्सल्य का रस बरसाने वाले हैं, उन श्री साईंनाथ को नमस्कार।

92.’ॐ श्री साईं सत्यपुरुषाय नम:’।
-ॐ जो धर्मपरायण, सत्पुरुष हैं, उन ऐसे श्री साईंनाथ को नमस्कार।

93.’ॐ श्री साईं पुरुषोत्तमाय नम:’।
-ॐ जो पुरुषोत्तम अर्थात श्रीराम के अवतार हैं, उन श्री साईंनाथ को नमस्कार।

94.’ॐ श्री साईं सत्यतत्वबोधकाय नम:’।
-ॐ जो सत्य के तत्व का बोध कराने वाले हैं, उन श्री साईंनाथ को नमस्कार।

95.’ॐ श्री साईं कामादिषडूवैरिध्वासिने नम:’।
-ॐ जो समस्त सांसारिक इच्छाओं और 6 विकारों (काम, क्रोध, लोभ, मोह, मद, मत्सर) का नाश करने वाले हैं, उन श्री साईंनाथ को नमस्कार।

96.’ॐ श्री साईं अभेदानंदानुभवरप्रदाय नम:’।
-ॐ जो भक्तों को स्वयं में एकाकार कर उससे उत्पन्न आनंद का अनुभव प्रदान करने वाले हैं, उन श्री साईंनाथ को नमस्कार।

97.’ॐ श्री साईं समसर्वमतसंमताय नम:’।
-ॐ जो सभी धर्म समान हैं, ऐसी धारणा रखने वाले हैं, उन श्री साईंनाथ को नमस्कार।

98.’ॐ श्री साईं दक्षिणामूर्तये नम:’।
-ॐ जो शिवरूपी हैं, उन श्री साईंनाथ को नमस्कार।

99.’ॐ श्री साईं वेंकटेशरमणाय नम:’।
-ॐ जो भगवान विष्णु से प्रेम वाले हैं, उन श्री साईंनाथ को नमस्कार।

100.’ॐ श्री साईं अद्भुतांतचर्याय नम:’।
-ॐ जो अद्भुत और अनंत लीलाओं को करने वाले हैं, उन श्री साईंनाथ को नमस्कार।

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101’ॐ श्री साईं प्रपन्नार्तीहराय नम:’।
-ॐ जो शरण में आए भक्तों के संकट का हरण करने वाले हैं, उन श्री साईंनाथ को नमस्कार।

102.’ॐ श्री साईं संसारसर्वदुखक्षरूपय नम:’।
-ॐ जो संसार के समस्त दुखों का नाश करने वाले हैं, उन श्री साईंनाथ को नमस्कार।

103.’ॐ श्री साईं सर्वत्सिव्रतोपुखाय नम:’।
-ॐ जो त्रिकालदर्शी और सर्वव्यापी हैं, उन श्री साईंनाथ को नमस्कार।

104.’ॐ श्री साईं सर्वांतर्बहि: स्थिताय नम:’।
-ॐ जो समस्त जीव और पदार्थों के अंदर और बाहर प्रत्येक स्थान में स्थित हैं, उन श्री साईंनाथ को नमस्कार।

105.’ॐ श्री साईं सर्वमंगलकराय नम:’।
-ॐ जो समस्त जग का कल्याण करने वाले हैं, उन श्री साईंनाथ को नमस्कार।

106.’ॐ श्री साईं सर्वाभीष्टप्रदाय नम:’।
-ॐ जो समस्त प्राणियों की कल्याणकारी इच्छाओं को पूरा करने वाले हैं, उन श्री साईंनाथ को नमस्कार।

107.’ॐ श्री साईं रामरसतन्मर्गस्थानपनाय नम:’।
-ॐ जो विभिन्न धर्मों के अनुयायियों को एकता और समानता के सूत्र में पिरोकर सन्मार्ग की स्थापना करने वाले हैं, उन श्री साईंनाथ को नमस्कार।

108.’ॐ श्री साईं समर्थसद् गुरुसाईंनाथाय नम:’।
-ॐ जो आत्मिक ज्ञान प्रदान करने वाले हैं, उन पूर्ण सद्गुरु श्री साईंनाथ को नमस्कार।

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