Rahim das ke dohe with meaning in hindi । रहीम दास के प्रसिद्ध दोहे हिंदी अर्थ सहित ।

संत रहीम के लोकप्रिय हिंदी दोहे

Rahim das ke dohe with meaning in hindi


-1 –

दुख में सुमिरन सब करे, सुख में करे न कोय।
जो सुख में सुमिरन करे, तो दुख काहे को होय॥

अर्थ : कि दुख में सभी लोग परमात्मा को याद करते हैं, मगर सुख में कोई नहीं करता । यदि व्यक्ति सुख में भी परमात्मा को याद करता। तो दुख कभी होता ही नहीं।


-2-

वे रहीम नर धन्य है, पर उपकारी अंग। 
बाटनवारे को लगे, ज्यों मेहन्दी को रंग।।

अर्थ : संत रहीम दास जी कहते है कि वे पुरुष धन्य है, जो दूसरों का उपकार करते है।  उन परोपकारी मनुष्यों पर रंग उसी प्रकार लग जाता है जैसे कि मेहन्दी बाटने वाले को कभी अलग से रंग लगाने की जरुरत नहीं पड़ती। 


-3-

बिगरी बात बने नहीं, लाख करो किन कोय। 
रहिमन फाटे दूध को, मथे न माखन होय।।

अर्थ: प्रत्येक मनुष्य को हर व्यक्ति के साथ सोच समझ कर ही अच्छा व्यवहार करना चाहिए। क्योंकि किसी कारण वश यदि आपसे उस व्यक्ति बात बिगड़ जाती है। तो फिर उसे बनाना अत्यधिक कठिन हो जाता है, जैसे यदि एक बार गलती से दूध फट गया तो लाख जतन (प्रयास) करने पर भी उस दूध को मथ कर मक्खन नहीं निकाला जा सकता। 


–4–

रहिमन धागा प्रेम का, मत तोरो चटकाय। 
टूटे पे फिर ना जुरे, जुरे गाँठ परी जाय।।

अर्थ: यहाँ पर संत रहीम जी कहते हैं कि प्रेम का नाता बड़ा ही नाज़ुक और कोमल होता है।  इस प्रेम के धागे को चटकने नहीं देना चाहिए।  यदि यह प्रेम का धागा एक बार टूट जाए  तो फिर इसे जोड़ना अत्यधिक कठिन कार्य है; और यदि जुड़ भी जाए तो टूटे हुए धागों के बीच में गाँठ तो पड़ ही जाती है। 


संत रहीम दास जी के हिंदी दोहे अर्थ सहित 

–5–

रहिमन देखि बड़ेन को, लघु न दीजिए डारि। 
जहां काम आवे सुई, कहा करे तरवारि।।

अर्थ: संत जी कहते हैं कि कभी भी बड़ी वस्तु को देख कर छोटी वस्तु को नहीं फेंकना चाहिए।  जहां पर छोटी सी सुई काम आती है, वहां तलवार बेचारी क्या कर सकती है?


–6–

जो रहीम उत्तम प्रकृति, का करी सकत कुसंग। 
चन्दन विष व्यापे नहीं, लिपटे रहत भुजंग।।

अर्थ: श्री रहीम जी कहते हैं कि जो उत्तम (अच्छे) स्वभाव के मनुष्य होते हैं,उनको बुरी संगति का भी कोई असर नहीं होता।  जैसे चन्दन के वृक्ष से हमेशा जहरीले सांप लिपटे रहते है मगर चन्दन के वृक्ष पर उसका कोई जहरीला प्रभाव नहीं पड़ता। 


–7–

रूठे सुजन मनाइए, जो रूठे सौ बार। 
रहिमन फिरि फिरि पोइए, टूटे मुक्ता हार।।

अर्थ: यदि आपका प्रिय बंधु आपसे सौ बार भी रूठ जाए तो भी उस रूठे हुए प्रियजन को मनाना चाहिए, क्योंकि यदि कीमती मोतियों की माला टूट जाए। तो क्या हम उनको दोबारा पिरोने का प्रयास नहीं करते। 


–8–

जो बड़ेन को लघु कहें, नहीं रहीम घटी जाहिं। 
गिरधर मुरलीधर कहें, कछु दुःख मानत नाहिं।।

अर्थ: यहाँ रहीम दास जी बहुत ही सुन्दर बात कहते है कि बड़े को छोटा कहने से कभी भी बड़े का बड़प्पन नहीं घटता, क्योंकि गिरिधर श्रीकृष्ण को मुरलीधर कहने से उनकी महिमा में कमी नहीं होती।  और न ही वो दुःख मानते है। 


Sant Rahim Ji ke Famous Hindi Dohe 


-9–

जैसी परे सो सहि रहे, कहि रहीम यह देह ।

धरती ही पर परत है, सीत घाम औ मेह ।।

अर्थ: ज्ञानी रहीम जी कहते है कि जैसा भी हमारे जीवन में या इस देह पर सुख-दुःख पड़ता है – सहन करना चाहिए, क्योंकि इस धरती पर ही सर्दी, गर्मी और वर्षा पड़ती है. अर्थात जिस प्रकार धरती सर्दी, धूप और वर्षा को सहन करती है, उसी प्रकार शरीर को सुख-दुःख सहन करना चाहिए। 


–10 –

खीरा सिर ते काटि के, मलियत लौंन लगाय। 

रहिमन करुए मुखन को, चाहिए यही सजाय।।

अर्थ: जैसे खीरे का कडवापन दूर करने के लिए उसके ऊपरी सिरे (भाग) को काटने के बाद नमक लगा कर घिसा जाता है. ठीक उसी प्रकार कड़ुवे मुंह वाले के लिए – कटु वचन बोलने वाले के लिए इस प्रकार की सजा उचित है। 

 

 


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