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हनुमान जी से सीखे झुक के रहना

हनुमान जी से सीखे झुक के रहना
हनुमान जी से सीखे झुक के रहना  निरअहंकारिता यदि सीखनी है तो पूरी दुनिया के रोल मॉडल है हमारे हनुमान जी ! हनुमान जी से सीखे झुक के रहना उनसे बड़ा निरहंकारी ढूँढना बड़ा मुश्किल है और उन्होंने ऐसे ऐसे काण्ड किये है (यहाँ पर आप पूछेंगे कि आपने इस लेख में काण्ड शब्द का इस्तेमाल क्यों
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दर्शन स्तुति-सकल ज्ञेय ज्ञायक तदपि

दर्शन स्तुति-सकल ज्ञेय ज्ञायक तदपि.... Sakal Gyey Gyayak Tadapi.....Darshan Stuti दर्शन स्तुति-सकल ज्ञेय ज्ञायक तदपि.... Darshan Paath. Jain Stuti. Jain Jinvani Sangrah. Darshan Stuti. दर्शन पाठ, जैन स्तुति,जैन जिनवाणी संग्रह,दर्शन स्तुति दोहा सकल ज्ञेय ज्ञायक तदपि, निजानन्द-रस-लीन। सो जिनेन्द्र जयवंत नित, अरि-रज-रहस विहीन॥ १॥ पद्धरि जय वीतराग विज्ञान पूर, जय मोह-तिमिर को हरन सूर। जय ज्ञान अनंतानंत धार, दृग-सुख-वीरज मण्डित अपार॥ २॥ जय परम
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समय का सदुपयोग कैसे करें

समय का सदुपयोग कैसे करें
समय का सदुपयोग कैसे करें पहला बुनियादी सवाल : आजकल समय की इतनी कमी क्यों महसूस होती है? समय का सदुपयोग कैसे करें क्या आपने कभी सोचा है कि आजकल हमें समय की इतनी कमी क्यों महसूस होती है ? समय पर काम न करने या होने पर हम झल्ला जाते हैं, आगबबूला हो जाते
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दर्शन स्तुति-प्रभु पतित पावन

भक्तामर स्तोत्र संस्कृत-Bhaktamar Stotra Sanskrit
दर्शन स्तुति-प्रभु पतित पावन Darshan Stuti (Prabhu Patit Pavan Main Apavan Jain Stuti Hindi प्रभु पतित पावन मैं अपावन, चरण आयो शरण जी | यो विरद आप निहार स्वामी, मेट जामन मरण जी |1| तुम ना पिछान्या आन मान्या, देव विविध प्रकार जी | या बुद्धि सेती निज न जान्यो, भ्रम गिन्यो हितकार
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Manglashtak(Arth Sahit) मंगलाष्टक (अर्थ सहित )

मंगलाष्टक (अर्थ सहित )-Manglashtak(Arth Sahit)
Manglashtak(Arth Sahit)मंगलाष्टक (अर्थ सहित ) Manglashtak(Arth Sahit) मङ्गलाष्टकम् श्रीमन्नम्र-सुरासुरेन्द्र-मुकुट-प्रद्योत-रत्नप्रभा भास्वत्पाद-नखेन्दवः प्रवचनाम्भोधीन्दवः स्थायिनः। ये सर्वे जिन-सिद्ध-सूर्यनुगतास्ते पाठकाः साधवः स्तुत्या योगिजनैश्च पञ्च गुरवः कुर्वन्तु ते मङ्गलम् ॥1॥ अर्थ:अणिमादि अनेक ऋद्धियों से युक्त तथा नमन करते हुए सुरेन्द्रों और असुरेन्द्रों के मुकुटों में लगे हुए कान्तियुक्त रत्नों की प्रभा से जिनके चरणों के नखरूपी चन्द्र भासमान हो रहे हैं, जो