Mirza Ghalib shayari-SagarDuniya

Mirza Ghalib shayari

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जैसा कि मिर्ज़ा ग़ालिब का नाम शायरी पसंद करने वाले लोगों ने सुना ही है। मगर उनका पूरा नाम शायद ही बहुत कम लोग जानते है। आपकी जानकारी के लिए बता दे कि उनका पूरा नाम मिर्ज़ा असद-उल्लाह बेग ख़ां उर्फ “ग़ालिब” और इनका समय (२७ दिसंबर १७९६ – १५ फरवरी १८६९) था। ये उर्दू एवं फ़ारसी भाषा के महान शायर थे। तो आज हम इनके सबसे प्रसिद्ध शायरी Mirza Ghalib shayari आपके लिए प्रस्तुत करते है। ghalib shayari in hindi उम्मीद है आपको पसंद आएगी। …..

1.न था कुछ तो ख़ुदा था कुछ न होता तो ख़ुदा होता
डुबोया मुझ को होने ने न होता मैं तो क्या होता

2. पीने दे बैठ कर मस्जिद में ग़ालिब
वरना वो जगह बता जहाँ खुदा नहीं

3. हम तो फना हो गए उसकी आँखे देखकर ग़ालिब
ना जाने वोह आईना कैसे देखते होंगे

4. मुझ से कहती है तेरे साथ रहूंगी सदा ग़ालिब
बहुत प्यार करती है मुझसे ये उदासी मेरी

5. हमको मालूम है जन्नत कि हकीकत लेकिन
दिल के खुश रखे को ग़ालिब ये ख्याल अच्छा है ..

Mirza Ghalib Shayari In Hindi

6. दर्द मिन्नत-कश-ए-दवा न हुआ
मैं न अच्छा हुआ बुरा न हुआ

7. दिल-ए-नादाँ तुझे हुआ क्या है
आख़िर इस दर्द की दवा क्या है

Mirza Ghalib shayari in Hindi
Mirza Ghalib shayari in Hindi

8. हज़ारों ख़्वाहिशें ऐसी कि हर ख़्वाहिश पे दम निकले
बहुत निकले मिरे अरमान लेकिन फिर भी कम निकले

9. कितना ख़ौफ होता है शाम के अंधेरों में
पूछ उन परिंदों से जिनके घर नहीं होते

10. वाइज़! तेरी दुआओं में असर हो तो मस्जिद को हिलाके देख- (वाइज का मतलब उपदेशक)
नहीं तो दो घूंट पी और मस्जिद को हिलता देख

Mirza Ghalib Shayari in Hindi 2 Lines on life

11. हाथों की लकीरों पे मत जा ऐ गालिब
नसीब उनके भी होते हैं जिनके हाथ नहीं होते

12. इशरत-ए-क़तरा है दरिया में फ़ना हो जाना-
दर्द का ह़द से गुजरना है दवा हो जाना

13.इश्क़ ने ग़ालिब निकम्मा कर दिया
वर्ना हम भी आदमी थे काम के

14. दर्द जब दिल में हो तो दवा कीजिए
दिल ही जब दर्द हो तो क्या कीजिए

15. दिल से तेरी निगाह जिगर तक उतर गई
दोनों को इक अदा में रज़ामंद कर गई

Mirza Ghalib Shayari on life

16. रगों में दौड़ते फिरने के हम नहीं क़ायल
जब आँख ही से न टपका तो फिर लहू क्या है

17. वो आए घर में हमारे, खुदा की क़ुदरत हैं!
कभी हम उमको, कभी अपने घर को देखते हैं

18. हर एक बात पे कहते हो तुम कि तू क्या है
तुम्हीं कहो कि ये अंदाज़-ए-गुफ़्तगू क्या है

19. हुई मुद्दत कि ‘ग़ालिब’ मर गया पर याद आता है,
वो हर इक बात पर कहना कि यूँ होता तो क्या होता !

20. यही है आज़माना तो सताना किसको कहते हैं,
अदू के हो लिए जब तुम तो मेरा इम्तहां क्यों हो

Mirza Ghalib love Shayari in Hindi

21. इश्क़ पर जोर नहीं है ये वो आतिश ‘ग़ालिब’,
कि लगाये न लगे और बुझाये न बुझे

22. उन के देखे से जो आ जाती है मुँह पर रौनक़।
वो समझते हैं कि बीमार का हाल अच्छा है।।

23. क़र्ज़ की पीते थे मय लेकिन समझते थे कि हां।
रंग लावेगी हमारी फ़ाक़ा-मस्ती एक दिन।।

24. मोहब्बत में नहीं है फ़र्क़ जीने और मरने का।
उसी को देख कर जीते हैं जिस काफ़िर पे दम निकले।।

25. तेरे वादे पर जिये हम, तो यह जान, झूठ जाना।
कि ख़ुशी से मर न जाते, अगर एतबार होता।।

26. रेख़्ते के तुम्हीं उस्ताद नहीं हो ‘ग़ालिब’।
कहते हैं अगले ज़माने में कोई ‘मीर’ भी था।।

27. बस-कि दुश्वार है हर काम का आसाँ होना।
आदमी को भी मयस्सर नहीं इंसाँ होना।।

Mirza Ghalib Best Shayari

28. तुम न आए तो क्या सहर न हुई
हाँ मगर चैन से बसर न हुई।

29. मेरा नाला सुना ज़माने ने
एक तुम हो जिसे ख़बर न हुई।।

30. ये हम जो हिज्र में दीवार-ओ-दर को देखते हैं।
कभी सबा को, कभी नामाबर को देखते हैं।।

31. वो आए घर में हमारे, खुदा की क़ुदरत हैं।
कभी हम उनको, कभी अपने घर को देखते हैं।।

32.निकलना ख़ुल्द से आदम का सुनते आए हैं लेकिन।
बहुत बे-आबरू हो कर तिरे कूचे से हम निकले।।

33. तेरे ज़वाहिरे तर्फ़े कुल को क्या देखें।
हम औजे तअले लाल-ओ-गुहर को देखते हैं।।

Mirza Ghalib Superhit Shayari

34. बना है शह का मुसाहिब, फिरे है इतराता।
वगर्ना शहर में “ग़ालिब” की आबरू क्या है।।

35.जला है जिस्म जहाँ दिल भी जल गया होगा।
कुरेदते हो जो अब राख जुस्तजू क्या है।।

36. ये न थी हमारी क़िस्मत कि विसाल-ए-यार होता।
अगर और जीते रहते यही इंतिज़ार होता।।

37. रंज से ख़ूगर हुआ इंसाँ तो मिट जाता है रंज।
मुश्किलें मुझ पर पड़ीं इतनी कि आसाँ हो गईं।।

38. रगों में दौड़ते फिरने के हम नहीं क़ाइल,
जब आँख ही से न टपका तो फिर लहू क्या है !!

39. ‘ग़ालिब’ बुरा न मान जो वाइ’ज़ बुरा कहे
ऐसा भी कोई है कि सब अच्छा कहें जिसे …

40. जो कुछ है महव-ए-शोख़ी-ए-अबरू-ए-यार है,
आँखों को रख के ताक़ पे देखा करे कोई !!

Mirza Ghalib Urdu Shayari

41. फ़िक्र-ए-दुनिया में सर खपाता हूँ
मैं कहाँ और ये वबाल कहाँ !!

42. इन आबलों से पाँव के घबरा गया था मैं,
जी ख़ुश हुआ है राह को पुर-ख़ार देख कर !!

43. ‏मुहब्बत में उनकी अना का पास रखते हैं,
हम जानकर अक्सर उन्हें नाराज़ रखते हैं !!

44. अर्ज़-ए-नियाज़-ए-इश्क़ के क़ाबिल नहीं रहा
जिस दिल पे नाज़ था मुझे वो दिल नहीं रहा

45. जी ढूँडता है फिर वही फ़ुर्सत कि रात दिन,
बैठे रहें तसव्वुर-ए-जानाँ किए हुए !!

46. फिर देखिए अंदाज़-ए-गुल-अफ़्शानी-ए-गुफ़्तार,
रख दे कोई पैमाना-ए-सहबा मिरे आगे !!

47. क़ासिद के आते आते ख़त इक और लिख रखूँ,
मैं जानता हूँ जो वो लिखेंगे जवाब में !!

48. है एक तीर जिस में दोनों छिदे पड़े हैं
वो दिन गए कि अपना दिल से जिगर जुदा था

49. आता है दाग-ए-हसरत-ए-दिल का शुमार याद,
मुझसे मेरे गुनाह का हिसाब ऐ खुदा न माँग।

Mirza Ghalib मिर्ज़ा ग़ालिब हिंदी शायरी

50. ता फिर न इंतज़ार में नींद आये उम्र भर,
आने का अहद कर गये आये जो ख्वाब में।

51. चाँदनी रात के खामोश सितारों की कसम,
दिल में अब तेरे सिवा कोई भी आबाद नहीं।

52. दिल गंवारा नहीं करता शिकस्ते-उम्मीद,
हर तगाफुल पे नवाजिश का गुमां होता है।

53. ज़िन्दगी अपनी जब इस शक्ल से गुज़री,
हम भी क्या याद करेंगे कि ख़ुदा रखते थे।

54. आया है बेकसी-ए-इश्क पे रोना ग़ालिब,
किसके घर जायेगा सैलाब-ए-बला मेरे बाद।

55. इश्क से तबियत ने जीस्त का मजा पाया,
दर्द की दवा पाई दर्द बे-दवा पाया।

56. तुम न आओगे तो मरने की हैं सौ तदबीरें,
मौत कुछ तुम तो नहीं है कि बुला भी न सकूं।

57. आईना देख के अपना सा मुँह लेके रह गए,
साहब को दिल न देने पे कितना गुरूर था।

Mirza Ghalib उर्दू शायरी

58. ये न थी हमारी किस्मत कि विसाल-ए-यार होता,
अगर और जीते रहते यही इंतज़ार होता।

59. आशिक़ी सब्र तलब और तमन्ना बेताब,
दिल का क्या रंग करूँ खून-ए-जिगर होने तक।

60. आशिक़ी सब्र तलब और तमन्ना बेताब,
दिल का क्या रंग करूँ खून-ए-जिगर होने तक।

आशा करता हूँ आप सभी ग़ालिब के दीवाने दोस्तों को Ghalib Shayari in Hindi बेहद ही पसंद आयी होगी। और ग़ालिब की शायरियों का भरपूर मज़ा आप सभी ने उठाया होगा। दोस्तों कृपया इस पोस्ट को ज्यादा से ज्यादा Share करे। ताकि आप के सभी दोस्त मिर्ज़ा ग़ालिब शायरी का लुफ्त उठा सके..

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