10 साल बाद लौटे आचार्य पुलक सागरजीबोले- मैं शरीर से गया था, मन तो यहीं था संतों का मिलन..

Pulak sagar jain muni

10 साल बाद लौटे आचार्य पुलक सागरजीबोले- मैं शरीर से गया था, मन तो यहीं था
संतों का मिलन..

अगवानी में निकाला 1.5 किमी लंबा जुलूस
      बांसवाड़ा


आचार्य पुलक सागरजी का 10 साल बाद शहर में मंगल प्रवेश हुआ है। इससे पहले जुलाई 2009-10 में मंगल प्रवेश हुआ था। उस समय पुलक सागरजी मुनि दीक्षा में थे। समाज के लोगों ने उनकी अगवानी के लिए करीब 1.5 किलोमीटर का भव्य जुलूस निकाला।

सुबह 8 बजे मुख्य डाकघर सर्किल से आचार्य पुलक सागरजी और मुनि श्री  प्रणीत सागरजी महाराज का मंगल प्रवेश हुआ। जहां शहर की सभी कॉलोनियों के नवयुवक मंडल, महिला मंडल, बालिका मंडल ने अगवानी की। साथ ही जहां आचार्य सुनील सागरजी के शिष्य मुनि श्री सुतेश सागरजी महाराज  का मिलन हुआ।  समाज के लाेगाें ने आचार्यजी का पाद प्रक्षालन किया। आचार्य जी की अगवानी में शहर में 101 द्वार बनाए गए। मुख्य डाक चौराहे से अगवानी करते हुए जुलूस कलेक्ट्रेट होते हुए जवाहर पुल से कुशलबाग मैदान पहुंचा। जहां हजारों की संख्या में भक्त लोग मौजूद रहे। जहां आचार्य जी का 51 थाली द्वारा गुरुदेव का पाद प्रक्षालन किया गया। । शाम के समय गांधी मूर्ति स्थित दिगंबर जैन धर्मशाला में आनंद यात्रा का कार्यक्रम हुआ एवं गुरुदेव की भक्ति में संगीतमय आरती उतारी गई।
संतों का मिलन…


. मुख्य डाक घर सर्किल पर आचार्य पुलक सागरजी महाराज शहर में मंगल प्रवेश पर आचार्य सुनील सागरजी महाराज  संघ के मुनि श्री श्रुतेष सागरजी महाराज से गले मिले। व  मुनि श्री  श्रुतेष सागरजी महाराज  ने आचार्यजी के पाद प्रक्षालन किए।


मेरे लिए बांसवाड़ा नहीं, वंशवाड़ा… दादीजी का समाधिमरण यहीं: आचार्य


       10 साल पहले शरीर से गया था, लेकिन मन से बांसवाड़ा ही था- आचार्य : कुशलबाद मैदान पहुंचने के बाद आचार्य पुलक सागर महाराज ने अपने भक्तों को प्रवचन देते हुए कहा कि मैं 10 साल बाद आया हूं। मैं शरीर से ही यहां से गया था लेकिन मेरा दिल तो बांसवाड़ा ही था। यहां की भक्ति के कारण मुझे बांसवाड़ा से हमेशा लगाव रहा है।

लोगों के लिए तो यह बांसवाड़ा है लेकिन मेरे लिए तो यह वंश-वाड़ा है। क्योंकि गृहस्थी अवस्था की दादीजी जो की आचार्य सन्मति सागर के संघ में आर्यिका माताजी थी। उनका समाधिमरण भी बांसवाड़ा में हुआ। साथ ही आचार्य जी ने शहर के लोगों की भक्ति की भी तारीफ करते हुए कहा कि महावीर जयंती 6 अप्रैल को आने वाली है। जिसमें बांसवाड़ा के सभी जैन समुदाय श्वेतांबर और दिगंबर सभी का एक साथ कार्यक्रम करने का प्रयास करुंगा।


आज से 8 दिवसीय ज्ञान गंगा महोत्सव होगा शुरू:
आचार्य पुलक सागर जी महाराज के मंगल प्रवेश के बाद अब सोमवार से 8 दिवसीय ज्ञान गंगा महोत्सव शुरु होगा। जिसमें कुशलबाग मैदान में आचार्य जी सुबह 8.30 बजे से 10 बजे तक धर्मसभा का आयोजन करेंगे। यह जानकारी मुनि संघ सेवा समिति के महामंत्री महावीर बोरा ने दी।
10 साल पहले मुनि दीक्षा में आए, अब आचार्य दीक्षा में मंगल प्रवेश

आचार्य पुलक सागर जी महाराज जुलाई 2009 में शहर में मंगल प्रवेश किया था। जब उनके पास मुनि दीक्षा थी और शहर में करीब 6 माह प्रवास पर रहे थे। आचार्य पुलक सागर द्वारा उस समय शहर में चातुर्मास के लिए मंगल प्रवेश हुआ था। साथ ही ज्ञान गंगा महोत्सव का भी आयोजन किया गया था। उसके बाद पर्वराज पर्यूषण द्वारा शिविर लगाया गया। जिसमें समाज के लोगों को पूजा और साधना की प्रेरणा दी गई। साथ ही चातुर्मास के दौरान कुशलबाग मैदान में भगवान आदिनाथ विधान किया गया। 31 दिसंबर 2009 की रात्रि को नव वर्ष के आगमन पर आदेश्वरी गांव में विशाल कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जिसमें युवाओं को वेस्ट सांस्कृति से बचने को कहा गया। फरवरी 2010 में बाहुबली कॉलोनी में सन्मति भगवान की पंचकल्याण प्रतिष्ठा का कार्यक्रम भी आचार्य जी के कर कमलों से ही हुआ था। मार्च 2010 में बांसवाड़ा से आचार्य जी का मध्यप्रदेश की तरफ विहार हुआ था। जिसके लिए राजस्थान सीमा पर भव्य विदाई कार्यक्रम का आयोजन किया गया था।
           संकलन  अभिषेक जैन लुहाड़ीया रामगंजमंडी