परम मित्र परम तीन मित्र प्रेरक कहानीपरम मित्र

एक मनोज नाम का व्यक्ति था उसके तीन मित्र थे।एक मित्र ऐसा था जो सदैव साथ देता था।एक पल,एक क्षण भी बिछुड़ता नहीं था।दूसरा मित्र ऐसा था जो सुबह शाम मिलता,और तीसरा मित्र ऐसा था जो हमेशा मिलता पर मनोज उससे अच्छे से बात नहीं करता था।


एक दिन कुछ ऐसा हुआ की मनोज को अदालत में किसी कार्यवश साथ में किसी को गवाह बनाकर साथ ले जाना था।अब मनोज सबसे पहले अपने उस मित्र के पास गया जो सदैव उसका साथ देता था और बोला:- “मित्र क्या तुम मेरे साथ अदालत में गवाह बनकर चल सकते हो?


वह मित्र बोला:- माफ़ करो दोस्त, मुझे तो आज समय ही नहीं।मनोज ने सोचा कि यह मित्र मेरा हमेशा साथ देता था।आज संकट के समय पर इसने मुझे मना कर दिया।


अब दूसरे मित्र की मुझे क्या आशा है?फिर भी हिम्मत रखकर दूसरे मित्र के पास गया जो सुबह शाम मिलता था,और अपनी समस्या सुनाई।

दूसरे मित्र ने कहा कि:- मेरी एक शर्त है कि मैं मात्र  अदालत के दरवाजे तक जाऊँगा, अन्दर तक नहीं।मनोज बोला कि:- बाहर के लिये तो मै ही बहुत हूँ मुझे तो अन्दर के लिये गवाह चाहिए।
फिर थक हारकर अपने तीसरे मित्र के पास गया

जिसके तरफ मनोज कम ध्यान देता था,और अपनी समस्या सुनाई।तीसरा मित्र उसकी समस्या सुनकर तुरन्त उसके साथ चल दिया।


अब हमारे जीवन में *तीन मित्र कौन है?* जैसे हमने तीन मित्रों की बात सुनी वैसे *हर व्यक्ति के तीन मित्र होते हैं।


सब से पहला मित्र है हमारा अपना ‘शरीर’ हम जहा भी जायेंगे,शरीर रुपी पहला मित्र हमारे साथ चलता है।एक पल, एक क्षण भी हमसे दूर नहीं होता।


दूसरा मित्र है शरीर के ‘सम्बन्धी’ जैसे :- माता-पिता, भाई-बहन,मामा-चाचा इत्यादि जिनके साथ रहते हैं,जो सुबह- दोपहर शाम मिलते है।


और तीसरा मित्र है :- हमारे ‘कर्म’ जो सदा ही साथ जाते है,पर हम उनके तरफ ध्यान नहीं देते।
आत्मा जब शरीर छोड़कर अगले भव में जाती है,उस समय शरीर रूपी पहला मित्र एक कदम भी आगे चलकर साथ नहीं देता।जैसे कि उस पहले मित्र ने साथ नहीं दिया।


*दूसरा मित्र – सम्बन्धी श्मशान घाट तक यानी अदालत के दरवाजे तक “राम नाम सत्य है” कहते हुए जाते हैं तथा वहाँ से फिर वापिस लौट जाते है।*


और *तीसरा मित्र हमारे कर्म हैं।कर्म जो सदा ही साथ जाते है चाहे अच्छे हो या बुरे।
अब अगर हमारे कर्म सदा हमारे साथ चलते है तो हमको अपने कर्म पर ध्यान देना होगा

अगर हम अच्छे कर्म करेंगे तो किसी भी बुरी गति में जाने की जरुरत नहीं होगी। और हमारे अच्छे कर्म हमारे लिए अच्छे गति के द्वार खोल देगा।


✍काल्पनिक कथाएं
*जैनम् जयतु शासनम् वंदे श्री वीरशासनम्*